रील्स, रायता और क्रांति: कैसे हमारा ‘जेन-जी’ ला रहा है भारतीय राजनीति में ‘एस्थेटिक’ बदलाव!

वाह! एनडीटीवी की इस विशेष रिपोर्ट को देखकर हमारी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। देश का ‘जेन-जी’ (Gen-Z) अब राजनीति बदल रहा है। अब तक हम सोचते थे कि हमारे देश के नौजवान केवल इंस्टाग्राम रील्स पर अजीबोगरीब… Continue Reading →

‘Slay’ भैया, ‘Cancel’ दीदी: भारत की ‘Gen-Z’ क्रांति और बूढ़े नेताओं का नया ‘कूल’ अवतार!

नमस्कार मित्रों! (और विशेष रूप से उन ‘Gen-Z’ दोस्तों को, जो अपनी पांच सेकंड की ‘अटेंशन स्पैन’ के कारण शायद इस लेख का पहला पैरा पढ़कर ही किसी रील पर स्क्रॉल कर जाएंगे)। हाल ही में हमारी गोदी और गैर-गोदी… Continue Reading →

जेब में बॉर्डर और दिल में शक: नए भारत की ‘पोर्टेबल’ नागरिकता!

— बधाई हो! अब आपको अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर जाने की कतई आवश्यकता नहीं है। हमारे परम प्रतापी गृह मंत्रालय ने आपकी सुविधा के लिए बॉर्डर को खुद आपके घर तक पहुँचा दिया… Continue Reading →

शाखा बनाम स्टारबक्स: जब घर की डाइनिंग टेबल बन गई ‘भारत-पाकिस्तान सीमा’!

कांव-कांव! भाई साहब, दुनिया के तमाम बड़े मुद्दों को छोड़िए, अल-जज़ीरा ने भारत के सबसे बड़े ‘गृहयुद्ध’ की खोज कर ली है। यह युद्ध किसी सरहद पर नहीं, बल्कि भारतीय घरों की डाइनिंग टेबल पर लड़ा जा रहा है। रिपोर्ट… Continue Reading →

मानसून सत्र का विसर्जन: जब संसद में बादलों से ज्यादा हमारे नेताओं ने गर्जना की!

आखिरकार, देश के सबसे बड़े ‘मनोरंजन थियेटर’ यानी हमारी संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया। बाहर इंद्रदेव ने अपनी कृपा बरसाई या नहीं, यह तो मौसम विभाग जाने, लेकिन संसद के भीतर विरोध, हंगामे और ‘वॉकआउट’ की ऐसी मूसलाधार… Continue Reading →

‘दबाव’ में छप्पन इंच: जब ब्लूमबर्ग को संसद में लोकतंत्र की ‘सर्दी-जुकाम’ दिखने लगी!

अरे भाई! जरा संभलकर। वैश्विक मीडिया के सबसे ‘गंभीर’ पंडित, यानी ब्लूमबर्ग वाले, आजकल दिल्ली की सड़कों और संसद की दीवानों में थर्मामीटर लेकर घूम रहे हैं। उन्हें अचानक पता चला है कि हमारे ‘अजेय’ साहब पर दबाव है! अब… Continue Reading →

मानसून सत्र का ‘फोटोशूट’: विपक्ष को मिलीं सुर्खियां, संसद को मिली सिर्फ ‘छुट्टियां’!

कांव-कांव! लीजिए साहब, लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में ‘मानसून का तमाशा’ समाप्त हुआ। दिल्ली की सड़कों पर तो पानी भरा ही, लेकिन हमारी संसद में जो ‘हंगामे’ की बाढ़ आई, उसने पूरे देश को तर-बतर कर दिया। अब मीडिया… Continue Reading →

‘संसदीय प्रेशर कुकर’ और साहेब की 56 इंची शांति: काक-वाणी की विशेष रिपोर्ट

प्रणाम भाइयों और उनकी बहनों! ‘काक-वाणी’ की मुंडेर पर आज एक विदेशी गोरी चिड़िया आकर बैठी है, जिसका नाम ‘ब्लूमबर्ग’ है। यह चिड़िया सात समंदर पार से उड़कर आई है और भारत के लोकतंत्र को देखकर चकित-भ्रमित है। इस विदेशी… Continue Reading →

‘पोर्टेबल बॉर्डर’ का नया फैशन: जेब में सीमा रेखा और दिल में शक!

नमस्कार, ‘काक-वाणी’ में आप सभी प्रबुद्ध पाठकों का स्वागत है। ऊपर ऊंचे पेड़ की डाल से जब हम कौवे नीचे इस इंसानी दुनिया को देखते हैं, तो आपकी ‘महानता’ और ‘बुद्धिमत्ता’ पर अनायास ही हमारी ‘कांव-कांव’ हंसी में बदल जाती… Continue Reading →

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युवा छात्रों के लिए एक मज़ेदार यात्रा का आयोजन

एक स्कूल ने अपने युवा छात्रों के लिए एक मज़ेदार यात्रा का आयोजन किया । रास्ते में वे सभी एक सुरंग से गुज़रे जिसके नीचे से पहले अक़्सर वो बस ड्राइवर गुज़रता था। सुरंग के किनारे पर लिखा था पांच… Continue Reading →