चीनी हुई महंगी: राष्ट्रवाद के मीठे घूंट में ‘भौतिक चिंताओं’ का कड़वा तड़का

वाह! क्या जमाना आ गया है। हम सोच रहे थे कि देश के नागरिक अब केवल हवा, राष्ट्रवाद और भव्य भाषणों के दम पर जीना सीख गए हैं। लेकिन नहीं, इन आम लोगों की जिद तो देखिए! इन्हें सुबह की… Continue Reading →

‘अतिथि देवो भव:’ बनाम ‘हसीना को वापस करो’: भारत-बांग्लादेश के बीच फंसा ‘डिप्लोमैटिक रायता’

वाह! अल जजीरा ने भी क्या गंभीर सवाल उठाया है। भारत और बांग्लादेश के रिश्ते आज उस मोड़ पर आ खड़े हुए हैं जहां ‘हसीना’ ही सबसे बड़ा गतिरोध बन गई हैं। ढाका में बैठे नए कर्ता-धर्ता नोबेल विजेता मोहम्मद… Continue Reading →

मीठी बातें और कड़वी चीनी: जब ‘अमृत काल’ में मिठास महंगी हो गई

वाह! क्या जमाना आ गया है। हम ‘विश्वगुरु’ बनने की दहलीज पर खड़े हैं, चंद्रयान चांद पर सैर कर रहा है, और देश के कुछ नासमझ नागरिक अब भी चाय में चीनी की कीमत ढूंढ रहे हैं! ‘टेलीग्राफ इंडिया’ के… Continue Reading →

हसीना जी का ‘गेस्ट अपीयरेंस’ और भारत-बांग्लादेश का कूटनीतिक ‘डेडलॉक’

स्वागत है कूटनीति के रसिकों! आज ‘काक-वाणी’ की पैनी नजर उस अंतरराष्ट्रीय त्रिकोण पर है, जिसे देखकर बड़े-बड़े आशिकों के सिर घूम जाएं। जी हां, हम बात कर रहे हैं भारत, बांग्लादेश और दिल्ली के किसी सुरक्षित ठिकाने पर चाय… Continue Reading →

‘द वायर’ की टाइम मशीन: मोदी न होते तो हम मंगल ग्रह पर बस चुके होते!

परम ज्ञानी और त्रिकालदर्शी वेब पोर्टल ‘द वायर’ ने एक बार फिर अपनी पत्रकारिता की दिव्य दूरबीन से इतिहास और भविष्य को एक साथ नाप लिया है। उनके नए और क्रांतिकारी ‘शोध’ के अनुसार, यदि देश में नरेन्द्र मोदी का… Continue Reading →

कॉकरोच का ‘आमरण अनशन’: भारतीय राजनीति के ‘गटर’ को साफ करने की अनोखी जंग

दुनियाभर के वैज्ञानिक यह जानकर हैरान हैं कि जो जीव डायनासोर के काल से लेकर परमाणु बम के महाविनाश तक को झेल गया, वह आज भारत के राजनेताओं के ‘किरदार’ के सामने घुटने टेकने पर मजबूर है। ब्रिटिश अखबार ‘द… Continue Reading →

गालीशास्त्र: भारतीय राजनीति का नया ‘काव्य’ रस और ‘सभ्य’ भाषा!

वाह! ‘द हिंदू’ के बुद्धिजीवियों ने आखिरकार हमारी राजनीति की उस ‘मधुर’ भाषा को पहचान ही ली, जिसे हम रोज़ टीवी चैनलों पर अपनी सुबह की चाय के साथ बड़े चाव से निगलते हैं। अखबार कहता है कि “अपशब्द और… Continue Reading →

नेताओं की ‘ईमानदारी’ देखकर कॉकरोच भी अनशन पर: अब नाले के जीव सिखाएंगे राजनीति का ककहरा!

द गार्डियन की एक ताजा रिपोर्ट ने हमारी छाती चौड़ी कर दी है। अब तक हम सोचते थे कि भारतीय राजनीति का स्तर केवल इंसानों को ही विचलित करता है, लेकिन नहीं! हमारी महान लोकतांत्रिक व्यवस्था ने अब नाली के… Continue Reading →

‘संभावनाओं की कला’ का नया चमत्कार: अब जेडीयू के आंगन में भी लहलहाएगी ‘परिवारवाद’ की फसल!

बिहार की राजनीति में मौसम वैज्ञानिकों की कमी नहीं है, लेकिन जेडीयू के मौसम वैज्ञानिक सबसे अनोखे हैं। वे हवा का रुख देखकर नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री आवास की खिड़कियों से आने वाली सुगबुगाहट को देखकर भविष्यवाणी करते हैं। ताजा खबर… Continue Reading →

गाली-शास्त्र: भारतीय राजनीति का नया ‘सभ्य’ व्याकरण

वह दिन गए जब नेताजी मंच पर आकर देश के विकास, जीडीपी और बेरोजगारी पर उबाऊ भाषण दिया करते थे। जनता भी बेचारी ताली बजाते-बजाते सो जाती थी। लेकिन अब, हमारे दूरदर्शी राजनेताओं ने राजनीति को एक नया ‘साहित्यिक रस’… Continue Reading →