मोदी जी के नाजुक कान और राहुल गांधी का ‘गाली-शास्त्र’

भारत में संस्कृति का संकट अचानक इतना गहरा गया है कि अब इस पर विदेशी मीडिया को भी अपनी स्याही खर्च करनी पड़ रही है। वाकया यह है कि एक प्रदर्शन के दौरान कुछ महिलाओं ने थोड़े ‘असंस्कारी’ यानी गाली-गलौज… Continue Reading →

लुटियंस का ‘कैमलोट’ और राजा आर्थर का नया अवतार

वाह! क्या दिव्य दृष्टि है। जब देश की साधारण जनता भीषण गर्मी, महंगाई और रोज़गार की तलाश में पसीना बहा रही है, तब हमारे परम आदरणीय बुद्धिजीवी ‘द वायर’ के दफ्तर में बैठकर भारत के लिए ‘कैमलोट मोमेंट’ (Camelot Moment)… Continue Reading →

‘संस्कृति’ का शॉक और राहुल गांधी का ‘रॉक’: जब गालियों पर छिड़ गया संस्कारी युद्ध!

भारतीय राजनीति में ‘संस्कृति’ एक ऐसा रबर बैंड है, जिसे जब मर्जी, जितना मर्जी खींच लिया जाता है। हाल ही में, सीजेआई (CJI) विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ महिलाओं द्वारा अपशब्दों का प्रयोग करने पर हमारे परम आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र… Continue Reading →

थरूर बाबू की अंग्रेजी और नेपाल का ‘बड़ा भाई’: कूटनीति या डिक्शनरी का खेल?

जब भी हमारे माननीय थरूर बाबू (यानी शशि थरूर जी) अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर मुंह खोलते हैं, तो सबसे पहले देश के आम नागरिक को अपने मोबाइल में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी खोलनी पड़ती है। इस बार उन्होंने भारत-नेपाल संबंधों पर ज्ञान की… Continue Reading →

‘संस्कारी’ कानों को लगा शॉक और राहुल बाबा का ‘डिक्शनरी’ ज्ञान

वाह! क्या बात है। हमारे देश की राजनीति इतनी कोमल और संवेदनशील हो चुकी है कि अब नेताओं के कान ‘टच मी नॉट’ (छुईमुई) के पौधे की तरह व्यवहार करने लगे हैं। ताजा मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘कल्चर… Continue Reading →

भारत का ‘कैमलोट मोमेंट’: जब लुटियंस के शूरवीरों ने कीचड़ में खोजा ‘किंग आर्थर’ का मुकुट

कांव-कांव! सुबह-सुबह जब हमारे घोंसले में ‘द वायर’ की कतरन उड़कर आई, तो हमारी कौआ-बुद्धि चकरा गई। लुटियंस दिल्ली के वातानुकूलित कमरों में बैठे बुद्धिजीवियों ने आखिरकार भारत के लिए ‘कैमलोट मोमेंट’ (Camelot Moment) ढूंढ ही निकाला। अब जिन्हें ‘कैमलोट’… Continue Reading →

राहुल गांधी की ‘सदाबहार जवानी’ और विदेशी चश्मे का नया चमत्कार

दुनिया में कई चीजें समय के साथ बूढ़ी हो जाती हैं—जैसे हिमालय की चट्टानें, गंगा का पानी और हमारी सरकारी फाइलें। लेकिन भारतीय राजनीति में एक चीज ऐसी है जो समय को ठेंगा दिखाकर हमेशा ‘जवां’ रहती है। जी हां,… Continue Reading →

‘अतिथि देवो भव’ बनाम ‘पड़ोसी परेशान भव’: हसीना जी की खातिरदारी में फंसा भारत-बांग्लादेश का ‘रिसेट’ बटन

वाह! अल जज़ीरा ने क्या गंभीर सवाल उठाया है। भारत और बांग्लादेश के रिश्ते आजकल उस कंप्यूटर की तरह हो गए हैं, जिसका ‘रिसेट’ बटन तो बार-बार दबाया जा रहा है, लेकिन स्क्रीन पर सिर्फ ‘बफरिंग’ का पहिया घूम रहा… Continue Reading →

अतिथि देवो भवः या ‘हसीना देवो भवः’? भारत-बांग्लादेश संबंधों का नया ‘हंगओवर’

राम-राम भाइयों! ‘काक-वाणी’ में आपका स्वागत है। आजकल हमारे अंतरराष्ट्रीय नीति-विशेषज्ञों और अल-जज़ीरा जैसे वैश्विक ज्ञानदाताओं की नींद उड़ी हुई है। मुद्दा बड़ा गंभीर है—बांग्लादेश और भारत के बीच ‘रिश्तों का रिसेट’ बटन जाम हो गया है। और इस जाम… Continue Reading →

‘क्या होता अगर मोदी न होते?’ – वायर की ‘टाइम ट्रैवल’ रिसर्च और हमारा खोया हुआ स्वर्ग!

विज्ञान और तकनीक ने कितनी भी तरक्की कर ली हो, लेकिन हमारे देश के लिबरल बुद्धिजीवियों की “काल्पनिक टाइम ट्रैवल” तकनीक के सामने नासा और इसरो भी पानी भरते नजर आते हैं। हाल ही में ‘द वायर’ महाशय ने एक… Continue Reading →