2029 का दूल्हा कौन? इंडिया गठबंधन के अनसुलझे ख्वाब और थलपति विजय की फिल्मी ‘एंट्री’

अभी 2024 की सरकार ने ठीक से अंगड़ाई भी नहीं ली है, बजट के वादे कागजों से बाहर भी नहीं निकले हैं, लेकिन हमारे दूरदर्शी राजनेताओं ने 2029 की बिसात बिछानी शुरू कर दी है। जी हां, इसे ही कहते… Continue Reading →

विदेशी हवा और ‘एक्सपोर्ट क्वालिटी’ हिंदुत्व: भागवत जी का नया ज्ञान

भैया, हमारे देश के संतों, नेताओं और विचारकों का एक गजब का हुनर है। जैसे ही ये सात समंदर पार अमेरिका की धरती पर कदम रखते हैं, इनके भीतर का ‘विश्वगुरु’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का कीड़ा अचानक कुलबुलाने लगता है।… Continue Reading →

ईरान को याद आया ‘विश्वगुरु’ का शांति पाठ: पेज़ेशकियान ने भारत से कहा- ‘भाई, थोड़ा मिडिल ईस्ट भी संभाल लो!’

वाह! क्या दिन आ गए हैं। जब पूरी दुनिया बारूद के ढेर पर बैठकर माचिस ढूंढ रही है, तब ईरान के नए नवेले राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान को अचानक भारत की याद आई है। उन्होंने हमारे देश से गुहार लगाई है… Continue Reading →

सोनिया गांधी की डायरी: खुलेंगे ‘रिमोट कंट्रोल’ और ‘मौन साधना’ के शाही राज!

बीबीसी वाले भी न, हमेशा हमारे देश के ‘शाही’ घराने पर लट्टू रहते हैं। अब उन्हें चिंता सता रही है कि सोनिया गांधी के आने वाले संस्मरण (मेमॉयर) में भारत के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवार के कौन से गहरे राज… Continue Reading →

उज्बेकिस्तान की हसीन वादियों में ‘विश्वगुरु’ का डेरा: जब SCO शिखर सम्मेलन बहाना हो और उड़ना ही असली निशाना हो!

नमस्कार पाठकों! ‘काक-वाणी’ के इस विशेष बुलेटिन में आपका स्वागत है। हमारे देश के परम पूज्य, अथक यात्री और पार्ट-टाइम भारत निवासी, श्री नरेंद्र मोदी जी एक बार फिर उड़ान भर चुके हैं। इस बार उनका विमान उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक… Continue Reading →

‘राजमाता’ की डायरी के पन्ने: जब मौन भी चिल्लाकर ‘सत्ता’ बोलेगा!

बीबीसी (BBC) आजकल गहरी चिंता में है। चिंता इस बात की है कि भारत के ‘सबसे शक्तिशाली’ राजनीतिक घराने की ‘राजमाता’ यानी सोनिया गांधी जी अपनी किताब में क्या लिखने वाली हैं। ‘काक-वाणी’ के दफ्तर में जब यह खबर उड़ी,… Continue Reading →

धन्य है हमारी ‘शाही’ नौकरशाही: जहां काम न करना ही सबसे बड़ा कर्तव्य है!

आखिरकार, ‘स्वराज्य’ पत्रिका ने उस परम सत्य पर से पर्दा उठा ही दिया, जिसे हम सब अब तक ‘सिस्टम की सुस्ती’ समझकर कोस रहे थे। सच तो यह है कि हमारी महान भारतीय नौकरशाही को बनाया ही इसलिए गया था… Continue Reading →

न्यूयॉर्क की हवा और नागपुर की दवा: भागवत जी का ‘विदेशी’ ज्ञान

वाह! न्यूयॉर्क की हवा में कुछ तो जादुई असर है। जैसे ही हमारे माननीय संघ प्रमुख मोहन भागवत जी का विमान जॉन एफ. कैनेडी एयरपोर्ट पर लैंड करता है, उनके भीतर का ‘उदारवादी वैश्विक नागरिक’ अचानक अंगड़ाई लेकर जाग उठता… Continue Reading →

‘निराशा’ के ऐतिहासिक आविष्कारक: जब दस साल बाद भी भाषणों की खुराक ‘कांग्रेस’ ही है!

आओ मिलकर सत्तर साल पीछे चलें भारतीय राजनीति का एक शाश्वत नियम है – सरकारें आती-जाती रहेंगी, योजनाएं बदलती रहेंगी, लेकिन कांग्रेस हमेशा सत्तापक्ष के भाषणों को ऊर्जा देने वाला ‘पावर हाउस’ बनी रहेगी। हाल ही में एनडीए के भव्य… Continue Reading →

भागवत जी का ‘विदेशी’ सेक्युलरिज्म और व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का भारी दुख!

वाह! जब-जब हमारे देश के परम आदरणीय मार्गदर्शक सात समंदर पार जाते हैं, तो उनके भीतर का ‘वसुधैव कुटुंबकम’ ऐसा हिलोरे मारता है कि न्यूयॉर्क और वाशिंगटन की सड़कों पर सेक्युलरिज्म की खुशबू आने लगती है। संघ प्रमुख मोहन भागवत… Continue Reading →