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किस्सा: एक अनजान राही की जोरी यह कहानी है एक अनजान

किस्सा: एक अनजान राही की जोरी यह कहानी है एक अनजान राही की, जिसकी लाइफ में एक किरकीकत जोड़ी ने कितना अहम भूमिका निभाई। मजदूर के नाम से जाना जाने वाला राही जीवन में भरे पड़े हुए सपनों की तलाश… Continue Reading

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आत्मा का सफ़र: सत्य, प्रेम और शांति की खोज

Title: आत्मा का सफ़र: सत्य, प्रेम और शांति की खोज आत्मा एक अनन्त प्रक्रिया है, जो सत्य, प्रेम और शांति की खोज में संघर्ष करती है। इस विश्वास के साथ कि हम सभी एक हैं, जो समस्तता में एकता और… Continue Reading

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सपना एक सुंदर सुबह की ताजगी के साथ ही आमिर

Title: सपना एक सुंदर सुबह की ताजगी के साथ ही आमिर नागरिकाधिकारी महेश राजवंशी की आँखें खुल जाती हैं। उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान होती है, क्योंकि वो जानते हैं कि वह किसी न किसी समस्या का समाधान निकालने में… Continue Reading

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“आत्मा की ऊंचाई: एक आध्यात्मिक यात्रा” वेदों के अनुसार, आत्मा

Title: “आत्मा की ऊंचाई: एक आध्यात्मिक यात्रा” वेदों के अनुसार, आत्मा हमारे सबसे मूल्यवान धरोहर है। यह हमारी उच्चता की धारा है, जो हमें जीवन के सारे संगठनों को अनुभव करने की शक्ति प्रदान करती है। जब हम अपनी आत्मा… Continue Reading

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अपने अस्तित्व – अस्मिता

एक आदमी एक मुर्गा खरीद कर लाया। एक दिन वह मुर्गे को मारना चाहता था, इसलिए उस ने मुर्गे को मारने का बहाना सोचा और मुर्गे से कहा, तुम कल से बाँग नहीं दोगे, नहीं तो मै तुम्हें मार डालूँगा।… Continue Reading

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चाटुकार

एक कर्मचारी कम्पनी के सभी कामों से बचता था लेकिन बॉस को मक्खन लगाने में बड़ा माहिर था। वह बॉस के आदेश के अनुसार सभी काम करता था। ऑफिशियल काम को छोड़ कर वह बॉस के सभी निजी काम जैसे… Continue Reading

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कुछ अलग करें, सबसे अच्छे बनें

एक आदमी को एक नाव पेंट करने के लिए कहा गया। वह अपना पेंट और ब्रश लाया और नाव को चमकीले लाल रंग से रंगना शुरू किया, जैसा कि मालिक ने उससे कहा था। पेंटिंग करते समय, उसने एक छोटा… Continue Reading

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दोस्ती ही पहला रिश्ता होता है

राम नाम के एक लड़के को पैसों की सख्त ज़रुरत थी. उसने अपने मालिक से मदद मांगी. मालिक पैसे देने को तैयार हो गया पर उसने एक शर्त रखी. शर्त ये थी कि राम को बिना आग जलाये कल की… Continue Reading

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ईमानदारी का पथ

नरोत्तम सेठ ने आज कहीं व्यस्त होने के कारण ईंट भट्टे पर फिर अपने बेटे को ही भेजा थे। बेटे का मन क़भी भी भट्टा पर नही लगता था , जिसके कारण वह अक्सर ग्राहकों से उलझ जाता था ,… Continue Reading

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जब मैं बूढ़ा हो जाऊँगा!

जब मैं बूढ़ा हो जाऊँगा, एकदम जर्जर बूढ़ा, तब तू क्या थोड़ा मेरे पास रहेगा? मुझ पर थोड़ा धीरज तो रखेगा न? मान ले, तेरे महँगे काँच का बर्तन मेरे हाथ से अचानक गिर जाए या फिर मैं सब्ज़ी की… Continue Reading