WhatsApp यूनिवर्सिटी के ‘ज्ञानवीर’ और वायरल दावों की क्रैश लैंडिंग

सुबह-सुबह जब आप चाय की चुस्की लेते हैं, तो आपके फोन की स्क्रीन “गुड मॉर्निंग” के चमकीले गुलाबों के साथ-साथ एक क्रांतिकारी वैज्ञानिक खोज से जगमगा उठती है। यह खोज हार्वर्ड या नासा से नहीं, बल्कि “व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी” के परम पूजनीय ‘डिपार्टमेंट ऑफ फॉरवर्डोलॉजी’ से आती है। इस यूनिवर्सिटी के डीन, चांसलर और प्रोफेसर हमारे अपने फूफाजी, मौसाजी और मोहल्ले के वो फुर्सती अंकल हैं, जिनके पास ब्रह्मांड की हर समस्या का अचूक इलाज मौजूद है।

यूनेस्को का पसंदीदा राष्ट्रगान और नासा की दिवाली

इस अनूठी यूनिवर्सिटी का पहला सबसे बड़ा सच यह है कि यूनेस्को (UNESCO) के पास दुनिया में और कोई काम नहीं बचा है, सिवाय हर साल भारत के राष्ट्रगान को “दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान” घोषित करने के। बेचारे यूनेस्को वाले पेरिस में अपना सिर पकड़कर बैठे हैं कि भाई, हमने ऐसा कोई अवॉर्ड कभी दिया ही नहीं! लेकिन हमारे व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन इस सत्य को मानने को तैयार नहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ, नासा (NASA) के वैज्ञानिक हर दिवाली को अंतरिक्ष में कैमरा दूरबीन लेकर सिर्फ इसलिए बैठते हैं ताकि भारत की जगमगाती हुई फर्जी फोटो खींच सकें। असलियत में वह फोटो किसी नौसिखिए एडिटर की करामात होती है, लेकिन हमारे देश के राष्ट्रवादी ग्रुप्स में उसे शेयर किए बिना किसी को चैन नहीं आता।

इलाइची से कैंसर का इलाज और नाभि में तेल के चमत्कार

मॉडर्न मेडिकल साइंस ने सालों रिसर्च की, अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन हमारे व्हाट्सएप के ‘अंगूठाछाप वैज्ञानिकों’ ने चुटकियों में कैंसर का इलाज खोज निकाला। ग्रुप में दावा आता है: “रोज सुबह खाली पेट दो इलायची खाने से कैंसर हमेशा के लिए खत्म! इसे इतना फैलाएं कि डॉक्टर अपनी दुकानें बंद कर दें।” अगर इस दावे में रत्ती भर भी सच होता, तो दुनिया के सारे बड़े अस्पताल बंद होकर वहां पतंजलि के स्टोर खुल चुके होते। एक और चमत्कारी नुस्खा है कि नाभि में दो बूंद तेल डालने से आंखें, बाल, घुटने और यहां तक कि आपका गिरता हुआ बैंक बैलेंस भी ठीक हो जाता है! कड़वा सच तो यह है कि इन दावों पर आंख मूंदकर यकीन करने वाले लोग डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं, जब इलायची थेरेपी उनका काम तमाम कर चुकी होती है।

‘फॉरवर्डेड ऐज रिसीव्ड’: परम ज्ञान का सुरक्षा कवच

इन सभी अद्भुत और काल्पनिक दावों के नीचे एक जादुई सुरक्षा कवच लिखा होता है – “फॉरवर्डेड ऐज रिसीव्ड” (जैसा मिला, वैसा भेज दिया)। यह पांच शब्द लिखते ही भेजने वाला अपनी सारी नैतिक, कानूनी और बौद्धिक जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है। चाहे वह दावा एलियंस के भारत आने का हो या फिर नमक के पानी से कोरोना भगाने का।

इस ‘काक-वाणी’ का सीधा सा संदेश यही है कि अगली बार जब आपके पास कोई ऐसा मैसेज आए जिसके नीचे लिखा हो “इसे 11 लोगों को भेजें, शाम तक खुशखबरी मिलेगी”, तो कृपया अपने अंगूठे को थोड़ा आराम दें। बिना सोचे-समझे फॉरवर्ड करने से सिर्फ अफवाहें फैलती हैं, ज्ञान नहीं। अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें, क्योंकि दिमाग मुफ़्त में मिला है, इसके लिए कोई इंटरनेट पैक नहीं डलवाना पड़ता!

कागा जी