अल-जज़ीरा की नई ‘खोज’: बंगाल की थाली से बीफ गायब, अब क्या सिर्फ ‘रसगुल्ला’ खाएंगे बंगाली?

वाह री अल-जज़ीरा की पत्रकारिता! जब दुनिया में युद्ध, मंदी और जलवायु परिवर्तन जैसे छोटे-मोटे मुद्दे चल रहे हैं, तब इस महान अंतरराष्ट्रीय संस्थान ने भारत के पश्चिम बंगाल में एक ऐसी ‘महा-त्रासदी’ ढूंढ निकाली है, जिससे पूरी दुनिया थर-थर कांप सकती है। उनकी ताजा रिपोर्ट कहती है कि बंगाल में ‘बीजेपी इफेक्ट’ के कारण बीफ गायब हो रहा है और लोगों को अपनी डाइट बदलनी पड़ रही है। सचमुच, दीदी के राज में बीजेपी का ऐसा खौफ? यह तो सीधे-सीधे ममता बनर्जी की ‘सॉवरेन’ सत्ता पर अल-जज़ीरा का सीधा ‘वैचारिक हमला’ है!

अंतरराष्ट्रीय रोना और बंगाल का ‘मेनू कार्ड’

हम तो अब तक यही समझते थे कि बंगाल में सिर्फ ‘माछ-भात’ और राजनीति की गर्म हवा चलती है, लेकिन अल-जज़ीरा के दूरदर्शी पत्रकारों को वहां एक नया ‘खाद्य संकट’ मिल गया। रिपोर्ट पढ़कर ऐसा लगता है कि जैसे बंगाल के लोग अब कुपोषण का शिकार हो रहे हैं क्योंकि उन्हें मनपसंद मांस नहीं मिल रहा। अरे भाई, जिस राज्य में सुबह की शुरुआत गरमा-गरम ‘लुची-अलोर दम’ से होती है और दोपहर ‘सोरशे इलिश’ के बिना अधूरी मानी जाती है, वहां अल-जज़ीरा को भुखमरी का यह नया रूप दिख गया। धन्य है वह चश्मा, जो केवल वही देखता है जो विदेशी पाठकों के एजेंडे में फिट बैठता है!

दीदी के गढ़ में ‘कमल’ का जादू या सिर्फ बहाना?

सबसे मजेदार बात यह है कि बंगाल में सरकार तृणमूल कांग्रेस की है। पुलिस उनकी, प्रशासन उनका, और ‘खेला’ भी उन्हीं का। लेकिन थाली से भोजन गायब होने का सारा श्रेय ‘बीजेपी’ को दिया जा रहा है। अगर बीजेपी सचमुच इतनी ताकतवर हो गई है कि धुर-विरोधी के गढ़ में घुसकर लोगों की रसोई का मेनू कार्ड बदल दे रही है, तो फिर ममता दीदी की ‘हुंकार’ का क्या हुआ? या फिर यह मान लिया जाए कि अल-जज़ीरा अनजाने में ही सही, लेकिन बीजेपी को बंगाल में कुछ ज्यादा ही शक्तिशाली और सर्वव्यापी दिखा रहा है?

काक-वाणी का कड़वा सच: प्रिय अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों, बंगाल में बीफ मिले न मिले, लेकिन राजनीतिक हिंसा और भ्रष्टाचार हमेशा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहता है। कभी उस पर भी अपना कैमरा घुमाइए। रही बात डाइट बदलने की, तो बंगाली बाबू आज भी उतने ही चाव से ‘कोशा मोंग्शो’ और रसगुल्ला खा रहे हैं। आपकी इस ‘क्रांतिकारी’ रिपोर्टिंग के लिए आपको काल्पनिक सहानुभूति मुबारक हो!


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कागा जी