बॉलीवुड का मतलब सिर्फ भारी-भरकम बजट, चमचमाते सितारे और नाच-गाना ही नहीं रह गया है भाई! हमारे देसी फिल्ममेकर्स ने अब इंटरनेशनल लेवल पर अपनी ऐसी धाक जमा ली है कि हॉलीवुड वाले भी हैरान हैं। हाल ही में ऑस्कर में अपना परचम लहराने वाले भारत के दो धाकड़ फिल्ममेकर्स अब टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में अपनी नई फिल्मों ‘Dorothy’ और ‘Termite’ के साथ तहलका मचाने के लिए तैयार हैं। काक-वाणी की चौपाल पर आज इसी बात का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, क्योंकि प्रतिष्ठित विदेशी मीडिया हाउस ‘इंडीवायर’ (IndieWire) भी इनके कसीदे पढ़ते नहीं थक रहा है!
ऑस्कर के वीरों का टोरंटो में नया धमाका
जी हां, यह खबर सीधे टोरंटो से आ रही है जहाँ भारतीय सिनेमा का एक नया और बेहद संजीदा चेहरा दुनिया के सामने पेश किया जा रहा है। ऑस्कर की सफलता का स्वाद चखने वाले हमारे इन जीनियस मेकर्स ने अब ‘Dorothy’ और ‘Termite’ जैसी लीक से हटकर फिल्में बनाई हैं। इंडीवायर की रिपोर्ट के मुताबिक, ये दोनों ही फिल्में भारतीय सिनेमा के लिए एक नया और क्रांतिकारी रास्ता तैयार कर रही हैं। ये फिल्में पारंपरिक मेलोड्रामा से कोसों दूर हैं और इनमें वो कशिश है, जो सीधे ग्लोबल ऑडियंस के दिलों को छूती है। TIFF में इन फिल्मों की स्क्रीनिंग को लेकर वर्ल्ड सिनेमा के दीवानों के बीच अभी से ही भारी बज बना हुआ है।
क्या हैं ‘Dorothy’ और ‘Termite’ की अनोखी कहानियां?
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इन फिल्मों में ऐसा क्या खास है? तो आपको बता दें कि ‘Dorothy’ और ‘Termite’ दोनों ही ऐसी कहानियां हैं जो समाज के उन अनछुए पहलुओं को उजागर करती हैं जिन्हें अक्सर बड़े पर्दे पर जगह नहीं मिलती। जहां एक तरफ मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों के जटिल ताने-बाने को बुना गया है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय समाज की गहरी हकीकत और संघर्ष को दिखाया गया है। यह फिल्में साबित करती हैं कि भारतीय इंडिपेंडेंट (Indie) सिनेमा अब ग्लोबल स्टैंडर्ड के मामले में किसी से भी पीछे नहीं है।
‘काक-वाणी’ की पैनी नजर: क्यों खास है यह ग्लोबल छलांग?
काक-वाणी का मानना है कि यह बदलाव भारतीय सिनेमा के सुनहरे भविष्य का संकेत है। ऑस्कर के रेड कार्पेट से लेकर टोरंटो के थिएटर तक का यह सफर दिखाता है कि जब कहानी में दम हो, तो भाषा की दीवारें अपने आप गिर जाती हैं। हमारे नए दौर के डायरेक्टर्स अब केवल भारतीय दर्शकों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को अपनी उंगलियों पर नचाने के लिए कहानियां लिख रहे हैं। अब देखना होगा कि TIFF में इन्हें कितना बड़ा स्टैंडिंग ओवेशन मिलता है, लेकिन एक बात तो साफ है—भारतीय सिनेमा का यह नया दौर अब रुकने वाला नहीं है!
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