ड्रैगन की ‘हग-डिप्लोमेसी’ और भारत का ‘बड़ा भाई’ सिंड्रोम: बांग्लादेश का नया लव ट्रायंगल!

कूटनीति के अंतरराष्ट्रीय कैबरे में जब ‘शतरंज की बिसात’ बिछती है, तो सबसे कमजोर मोहरे भी खुद को वज़ीर समझने की भूल कर बैठते हैं। ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की हालिया रिपोर्ट चीख-चीख कर कह रही है कि बांग्लादेश अब… Continue Reading →

बंगाल में ‘बीफ’ का संकट और अल-जज़ीरा की आंसुओं भरी दूरबीन!

प्रणाम पाठकों! स्वागत है आपका ‘काक-वाणी’ के इस विशेष बुलेटिन में, जहाँ हम राजनीति की सड़ी-गली सड़कों पर उड़ते हुए कचरे में से सच के मोती चुनते हैं। आज हमारी दूरबीन ने कतर के सरकारी चश्मे ‘अल-जज़ीरा’ को रोते हुए… Continue Reading →

‘काक-वाणी’: बंगाल से ‘बीफ’ गायब! अल-जज़ीरा की इस ‘महा-खोज’ पर रोएं या हंसें?

वाह! अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता के मसीहा ‘अल-जज़ीरा’ की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनकी ताजा ‘खोजी रिपोर्ट’ कहती है कि बंगाल में भाजपा के डर से ‘बीफ’ गायब हो रहा है और लोगों को जबरन अपनी… Continue Reading →

अल-जज़ीरा की नई ‘खोज’: बंगाल की थाली से बीफ गायब, अब क्या सिर्फ ‘रसगुल्ला’ खाएंगे बंगाली?

वाह री अल-जज़ीरा की पत्रकारिता! जब दुनिया में युद्ध, मंदी और जलवायु परिवर्तन जैसे छोटे-मोटे मुद्दे चल रहे हैं, तब इस महान अंतरराष्ट्रीय संस्थान ने भारत के पश्चिम बंगाल में एक ऐसी ‘महा-त्रासदी’ ढूंढ निकाली है, जिससे पूरी दुनिया थर-थर… Continue Reading →

पंजाब की जलती लंका में कांग्रेस के दो ‘धृतराष्ट्र’: अजय माकन और मीनाक्षी नटराजन की एंट्री!

जब-जब कांग्रेस रूपी जहाज में छेद बड़ा होने लगता है और उसमें पानी भरने लगता है, तब-तब आलाकमान अपने तरकश से सबसे अचूक मिसाइलें निकालता है—जिन्हें राजनीति की भाषा में ‘पर्यवेक्षक’ कहा जाता है। इस बार पंजाब की राजनीति के… Continue Reading →

ब्रिक्स की थाली में कूटनीति का ‘चिकन टिक्का’: अब मेन्यू तय करेगा राष्ट्रवाद!

वाह! धन्य है हमारा महान लोकतंत्र और उससे भी महान हमारे राजनेता। जब दुनिया युद्ध, वैश्विक मंदी और जलवायु परिवर्तन जैसी मामूली समस्याओं से जूझ रही है, तब हमारे देश के दूरदर्शी नेता एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर… Continue Reading →

यूपी का नया ‘कलर वॉर’: जब समाजवाद को चढ़ा बसपा का ‘नीला’ बुखार!

उत्तर प्रदेश की महान राजनीति को कोटि-कोटि नमन! जब सूबे से बेरोजगारी, टूटी सड़कें, सांडों का आतंक और महंगाई जैसे छोटे-मोटे मुद्दे पूरी तरह से हल हो चुके हैं, तब हमारे जननायकों ने एक बेहद गंभीर और राष्ट्रीय महत्व के… Continue Reading →

पंजाब की सुलगती भट्टी में घी डालने पहुंचे ‘पर्यवेक्षक’ अजय माकन और मीनाक्षी नटराजन

कांग्रेस पार्टी का एक पुराना और बेहद अनूठा उसूल रहा है—’जब भी घर में आग लगे, तो फायर ब्रिगेड बुलाने के बजाय, दूरबीन लेकर तमाशा देखने वाले दो नए ‘पर्यवेक्षक’ (ऑब्जर्वर) नियुक्त कर दो।’ इस बार इस महान लोकतांत्रिक परंपरा… Continue Reading →

नीले रंग का पेटेंट: जब यूपी के ‘समाजवाद’ को ‘मायावी’ आसमानी से इश्क हो गया

उत्तर प्रदेश की राजनीति इतनी ‘रंगीन’ हो चुकी है कि अब वैज्ञानिकों को भी अपने लाइट स्पेक्ट्रम की चिंता होने लगी है। राज्य में बेरोजगारी, महंगाई और सड़कों के गड्ढे जैसी मामूली समस्याएं तो कब की हल हो चुकी हैं।… Continue Reading →

ब्रिक्स की प्लेट में ‘चिकन’ बनाम ‘पनीर’: वैश्विक कूटनीति की सबसे बड़ी ‘थाली जंग’

वाह रे हमारी राजनीति! दुनिया के सबसे ताकतवर नेता रूस के कजान में बैठकर डॉलर को पटकनी देने और नया वर्ल्ड ऑर्डर बनाने की कसम खा रहे थे, और हमारी राष्ट्रवादी सरकार व सतर्क विपक्षी सेनाएं इस बात पर सिर-फुटौव्वल… Continue Reading →