ब्रायन लारा की ‘गुगली’: इमरान खान के दर्द में रोया वेस्टइंडीज, पाकिस्तानी जनरलों की ‘पिच’ गीली!

वाह रे कुदरत का निजाम! पाकिस्तान में वैसे तो आटा, बिजली और सरकार, तीनों ही कब गायब हो जाएं, कोई नहीं जानता। लेकिन जब क्रिकेट के शहंशाह ब्रायन लारा वेस्टइंडीज की हसीन वादियों से बैठकर रावलपिंडी की ‘पिच’ और अदियाला… Continue Reading →

महामानव का ‘अमर’ सिंहासन: जब तक सूरज-चाँद रहेगा, ‘प्रधान सेवक’ का राज रहेगा!

वाह! बधाई हो मित्रों, बधाई हो! आखिरकार वह ऐतिहासिक घड़ी आ ही गई, जिसका इंतजार सदियों से इस देश की ‘परम-भक्त’ जनता को था। सरकारी भोंपू यानी ‘न्यूज ऑन एआईआर’ ने ढोल-नगाड़े बजाकर घोषणा की है कि हमारे परम आदरणीय,… Continue Reading →

रीलराज में विदा होते ‘माननीय’: जब राजनीति का ‘क्रिंज’ झेलने से जेन-जी ने किया इनकार

एनडीटीवी के एक ओपिनियन ने हमारे देश के सत्तर पार वाले नेताओं की रातों की नींद हराम कर दी है। खबर आई है कि भारत की ‘जेन-जी’ (Gen Z) यानी आज की युवा पीढ़ी को हमारी पारंपरिक, संस्कारी और जाति-धर्म… Continue Reading →

सत्ता के ‘अमरबेल’ मोदी जी: बिना थके, बिना रुके, बस कैमरा और कुर्सी का साथ!

बधाई हो मित्रों, बधाई हो! आखिरकार वह शुभ घड़ी आ ही गई, जिसका इंतजार सदियों से भारत की १३५ करोड़ (या अब शायद १४० करोड़) जनता कर रही थी। ऑल इंडिया रेडियो ने ढोल-नगाड़े बजाकर घोषणा की है कि हमारे… Continue Reading →

जीडीपी का नया जादुई चश्मा: जब पेट खाली हो, तो सरकारी डेटा चबाएं!

वाह! क्या आंकड़े हैं। जब पूरा देश महंगाई, बेरोजगारी और खाली जेबों का रोना रो रहा है, तब हमारी जीडीपी ऐसे दौड़ रही है जैसे उसे कोई ओलंपिक मेडल जीतना हो। हाल ही में ‘स्क्रॉल’ ने एक गंभीर सवाल उठाया… Continue Reading →

7.8% जीडीपी का जादुई आंकड़ा: जेब खाली पर आंकड़ों में देश ‘विश्वगुरु’ बन रहा है!

वाह! बधाई हो भारतवासियों! अपनी खाली जेबों को थोड़ा और सिकोड़ लीजिए, क्योंकि देश की जीडीपी अब 7.8% की रफ़्तार से हवा में उड़ रही है। एनडीटीवी की खबर है कि इस आंकड़े को लेकर राजनीति में उबाल आ गया… Continue Reading →

जोक से क्रांति: जब ‘मजाक’ बन गया चुनावी महामंत्र

न्यूयॉर्क टाइम्स को अब जाकर यह समझ में आया है कि एक मामूली मजाक से भी राजनीतिक आंदोलन शुरू किया जा सकता है। सचमुच, पश्चिमी मीडिया की बुद्धि कितनी धीमी चलती है! हमारे महान लोकतंत्र में तो कई बार पूरा… Continue Reading →

जीडीपी का दिव्य डेटा: जेब खाली हो तो क्या, आंकड़ों की मलाई खाइए!

हाल ही में ‘स्क्रॉल’ ने एक बड़ा ही बचकाना सवाल उठा दिया—”आखिर लोग भारत के जीडीपी (GDP) आंकड़ों पर भरोसा क्यों नहीं कर रहे?” अब भला इस सीधे-सादे सवाल के पीछे छिपे गहरे ‘राष्ट्रवाद’ को ये विदेशी चश्मे वाले पत्रकार… Continue Reading →

ड्रैगन का ‘कुकड़ूं-कूं’ और हमारी ‘लाल आंखें’: भारत में चीन अध्ययन की दिव्य लीला

वाह! तो अब हमारे देश के नीति-नियंता और बुद्धिजीवी इस बात पर माथापच्ची कर रहे हैं कि भारत में “चीन अध्ययन” (China Studies) की क्या स्थिति है। ओआरएफ (ORF) की ताजा रिपोर्ट कहती है कि हमें भू-राजनीति, अर्थशास्त्र और अकादमिक… Continue Reading →

राष्ट्र-प्रथम का नया आविष्कार: 2014 से पहले तो भारत केवल एक भौगोलिक भूल था!

आदरणीय देशवासियों, अपनी आँखें खोलिए और कृतज्ञता से भर जाइए! ऑल इंडिया रेडियो (News On AIR) के सौजन्य से हमें एक अत्यंत क्रांतिकारी सत्य का पता चला है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने घोषणा की है कि भाजपा ने भारतीय… Continue Reading →